Thursday, May 7, 2015

नेपाल में भयावह त्रासदीः हजारों लोग भूकम्प में मरे

वर्ष-18, अंक-09(01-15 मई, 2015)   
 25 अप्रैल को दक्षिण एशिया के हिमालयी क्षेत्र में आये तीव्र भूकम्प जो कि रियेक्टर पैमाने पर 7.9 तीव्रता का था ने नेपाल, तिब्बत और भारत के बिहार में व्यापक तबाही मचायी। नेपाल में इस भूकम्प से सबसे ज्यादा जान-माल की हानि हुयी। अनुमान है कि नेपाल में दस हजार से भी ज्यादा लोग मारे गये और घायलों की संख्या कई हजारों में है।
    नेपाल के बाद सबसे ज्यादा जानें भारत के बिहार प्रांत में गई। वहीं तिब्बत में दो दर्जन से अधिक लोग इस भूकम्प की चपेट में आ गये।

कश्मीर घाटी फिर गरमायी

वर्ष-18, अंक-09(01-15 मई, 2015)   
 कश्मीरी जनता का आक्रोश एक बार फिर सड़कों पर फूट रहा है। कश्मीर घाटी फिर से बड़े-बड़े प्रदर्शनों-बंदों की गवाह बन रही है। 
आजादी के नारे फिर से हवाओं में तैरने लगे हैं। साल दर साल कश्मीरी जनता का सड़कों पर उतरता आक्रोश यही बतलाता है कि भारतीय शासक संगीनों के दम पर कश्मीरी जनता की आकांक्षा को कुचल नहीं सकते। 
    14 अप्रैल को भारतीय सेना ने दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल गांव में खालिद नामक एक नवयुवक की पीट-पीट कर हत्या कर दी। इसके पश्चात सेना ने उसे आतंकी घोषित करते हुए मुठभेड़ में उसका मारा जाना घोषित कर दिया। इसके पश्चात उसके शव को तुरंत दफना भी दिया गया। उसके पिता बताते रहे कि उसके शरीर पर उत्पीड़न के ढेरों निशान थे पर गोली का एक भी निशान नहीं था। पर उनकी इस बात की कोई सुनवाई नहीं हुयी। 

Friday, May 1, 2015

सीताराम येचुरी की सदारत में माकपा

वर्ष-18, अंक-09(01-15 मई, 2015)    
सीताराम येचुरी भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी) की केन्द्रीय कमेटी के नये महासचिव चुने गये हैं। उन्होंने प्रकाश करात को प्रतिस्थापित किया है। यह विशाखापत्तनम में आयोजित पार्टी की इक्कीसवीं कांग्रेस में सम्पन्न हुआ। 
    प्रकाश करात के बदले सीताराम येचुरी के नेतृत्व में माकपा का क्या भविष्य होगा? क्या वह देश की पूंजीवादी राजनीति में अपनी कोई प्रभावी भूमिका बना पायेगी?

Thursday, April 16, 2015

फर्जी इनकांउटर में पुलिस ने की 25 निर्दोषों की हत्या

वर्ष-18, अंक-08(16-30 अप्रैल, 2015)
  7 अप्रैल को आंध्र प्रदेश पुलिस ने दो बड़े कारनामों को अंजाम दिया। पूंजीवादी मीडिया की खबरों के मुताबिक स्पेशल टास्क फोर्स ने चंदन तस्करों से इनकांउटर में 20 तस्कर मार गिराये और दूसरी घटना में जेल से अदालत लाते समय 5 आतंकियों ने पुलिस से हथियार छीनने की कोशिश की जिसके चलते हुए इनकाउंटर में पांचों आतंकी मारे गये। 
    वास्तविकता पुलिस की कहानी के एकदम उलट थी। पहली घटना में मारे गये 20 लोग तस्कर नहीं सामान्य गरीब मजदूर थे। दूसरी घटना में पुलिस ने सोचे समझे तरीके से पांचों अभियुक्तों को गाड़ी में ही मार गिराया। दोनों ही घटनाओं के लिए इनकांउटर का दर्जा देने के लिए कहानी गढ़ ली गयी जो कुछ इस तरह थी। 

मजदूरों-किसानों को लूटने-ठगने को एक ‘नई’ पार्टी

वर्ष-18, अंक-08(16-30 अप्रैल, 2015)   
  भारतीय पूंजीवादी राजनीति में एक नई पार्टी के बनने की चर्चा जोरों पर है। यह पार्टी जनता परिवार के एकजुट होते जाने से अस्तित्व में आने वाली है। समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल (राजद), जनता दल (यूनाइटेड), जनता दल (सेकूलर), इण्डियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) और समाजवादी जनता पार्टी (एसजेपी) के एक होने से इस पार्टी के अप्रैल माह के बीतते-बीतते सामने आ जाने की सम्भावना है। मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में इस पार्टी का नाम समाजवादी जनता पार्टी और चुनाव चिह्न साइकिल पर सहमति विलय करने वाले दलों के बीच बनी है।

‘नागरिक’ के सम्पादक व उपपा महासचिव पर जानलेवा हमला

वर्ष-18, अंक-08(16-30 अप्रैल, 2015)    
 31 मार्च को ‘नागरिक’ के सम्पादक मुनीष कुमार और उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी पर उत्तराखण्ड के एक खनन माफिया ने अपने गुण्ड़ों के जरिये जानलेवा हमला करवाया। इस हमले में दोनों ही लोगों को गम्भीरें चोटें आयीं। प्रभात ध्यानी को घायलावस्था में कई दिन अस्पताल में गुजारने पड़े।

Wednesday, April 1, 2015

यमन पर अमेरिकी साम्राज्यवाद की शह पर साऊदी अरब का हमला

वर्ष-18, अंक-07(01-15 अप्रैल, 2015)
    अमेरिकी साम्राज्यवाद के पूर्ण समर्थन से साऊदी अरब ने यमन पर भीषण हवाई हमले 25 मार्च की रात से शुरू कर दिये। इन हमलों में भारी पैमाने पर जान-माल की हानि हुयी है। इन हवाई हमलों के साथ साऊदी अरब बड़े जमीनी सैन्य हमले की तैयारी कर रहा है ताकि अपनी पिट्ठू सरकार को पुनः स्थापित कर सके। भारत सहित विभिन्न देशों के अप्रवासी मजदूर और अन्य नागरिक वहां फंसे हुए हैं। 
    यमन वर्ष 2011 के अरब जनउभार के समय से ही राजनैतिक अस्थिरता का शिकार है। ध्यान रहे जनवरी 2011 में गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार के साथ अब्दुल्ला सालेह की तानाशाही से आजिज आ गये यमन वासियों ने व्यापक जनांदोलन किया था। अब्दुल्ला सालेह ने यमन के संविधान में परिवर्तन करके अपने को आजीवन राष्ट्रपति और अपने पुत्र अहमद सालेह को उत्तराधिकारी के रूप में घोषित करने का प्रयास किया था। सालेह के इन कदमों ने उस आक्रोश और क्षोभ को जन्म दिया था जिसके कारण उन्हें सत्ता छोड़नी पड़ी और उन्होंने अपने संरक्षक साऊदी अरब में अंततः शरण ले ली।